मेरी कहा ना हे...

दिल दे देंगे तुझे मेरी कहा ना हे।
नापना मेरे ईश्क की गहराई
मेरी कहा ना हे।
तु प्रेम दे या जखमो की भेंट।
स्वीकार करेंगे उसे मेरी कहा ना हे।
तेरी खुशी मे मेरी खुशी हे।
तु जिते हर बाजी मे हारु
मेरी कहा ना हे ।
लेना इनतहा मेरे ईश्क की।
रख दूगा दिल निकाल तेरी हथेली पे।
मेरी कहा ना हे।
हाथ पकड़ ना छोड़ना बिच राह में।
आखरी सांस तक दुगा साथ तेरा।
मेरी कहा ना हे

कृष्णा बेदर्दी ©

Comments

Popular posts from this blog

ये आशा...

ईश्क की गहराई..