याद कर वो लमहे..

बेदर्दी याद कर वो लमहों को।
जो लमहे मेरी बाहों मे बिताए।
जो लमहे मुझे सीने से लगाएँ।
जो लमहे आँखों से आँखों को मिलाएँ।
जो लमहे मुझे देख मुस्कराए।
जो लमहे ना देख आँसू बहाएँ ।
रखते हाथ मेरे हाथों पे ।
सुनाई हाले दिल अपना ।
कभी कभी लगता है था ये सब सपना।

कृष्णा बेदर्दी ©

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